खाकी के साये में दरोगा जी का भौकाल...
“मा$₹ c@d#… भागता है कि नहीं यहां से…!” ये शब्द किसी सड़कछाप गुंडे के नहीं, बल्कि खाकी वर्दी पहनकर कानून का राज कायम करने की शपथ लेने वाले एक डबल स्टार वाले दरोगा जी के हैं। जनाब की तैनाती मुजफ्फरपुर जिले के उस इलाके के एक थाने में है, जहां से थोड़ी दूरी पर दरभंगा की सीमा और बागमती की धार बहती है। दरोगा जी युवा हैं, जोश में हैं और शायद यही वजह है कि खाकी का गुमान अक्सर उनकी जुबान पर हावी हो जाता है। थाने में पद के हिसाब से साहब थानेदार से बस एक सीढ़ी नीचे हैं , लेकिन रुतबा ऐसा कि मानो इलाके के खुदभूले ‘सिंघम’ हों। विभागीय नियम कहते हैं कि थाने या चौकी पर आने वाले आम लोगों को सम्मान और पारिवारिक माहौल मिलना चाहिए, ताकि वे अपनी समस्या खुलकर बता सकें। लेकिन यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। TV24 News यहां फरियादी अपनी फरियाद लेकर पहुंचता है, और दरोगा जी उसे सुनते-सुनते कब “आशीर्वचन” यानी गालियों की सौगात दे दें, इसका कोई ठिकाना नहीं। दरोगा जी कानून के भी बड़े पाबंद बताए जाते हैं। इतना पाबंद कि अगर कोई व्यक्ति थाने के सिरिस्ता की ओर कदम बढ़ा दे, तो पहले ही उस...